बुधवार, 22 जनवरी 2020

वो यहां रोज़ आती है!



उन उंगलियों के बीच सिगरेट आधी जल चुकी थी, पर सिगरेट काफ़ी नहीं थी शर्द कि उस आधी रात से लड़ने के लिए। उसके मुंह से आती फूउउउउ..फूउउउउ.. कि आवाज़ इस बात को उसके आस पास से गुज़र रहे उन तमाम लोगों को बता रही थी कि उसके शरीर के अंदर ठंड घुस गई है और अब उसको गर्माहट की जरूरत है। तो फिर क्या ही मज़बूरी है इस लड़की की कि जो यहां इस पीले बल्ब के खंभे के नीचे खड़ी होना ज्यादा पसंद कर रही है वापस अपने घर जाने के बजाय। 

वहां पर मौजूद कुछ लोग अचानक से हंसते हैं और वो भी सिगरेट के धुंए को नाक से निकालती हुई उनकी तरफ देखती है और फिर एक मुस्कान उसके होंठों पर ठहर जाती है। सर के उपर पीली रोशनी देता वह खंभा और उसके होंठों पर लगी लाल लिपस्टिक का कुछ ज्यादा ही गाढ़ा होना, दूर से ही, चमक से रहे थे उसके होंठ। ऐसा लग रहा था जैसे कि वो किसी और के होंठों के लिए भी अपने ही होंठों पर लिपस्टिक लगा के आई हो। 

वो उसकी तरफ घूरते हुए निकल रहे उन तमाम लोगों के हंसने का जवाब नहीं देती है पर एक पैर से दूसरे पैर पर टेक लगाकर हाथों को कमर पर टिकाये हुए हाथ में आधी जली सिगरेट लिए हुए वहां से दूर खड़े लोगों को देखती है, उसका देखना ऐसा था कि मानो जैसे तुम भूल गए पर वो तुम्हे जानती हो। उसका यू एक टक देखना ऐसा लग रहा था जैसे वर्षों से वो जानती हो मुझे और इंतज़ार मेरा ही कर रही हो। 

उसके पैरों में 'हाई हिल्स' थी, जिसे आमतौर पर लड़कियां किसी खास दिन या पार्टी के समय ही पहनती हैं। पर उसका चेहरा तो इस बात कि गवाही नहीं दे रहा था कि वो वहां मौज-मस्ती या चिंता से दूर पार्टी करने आई हो, या आई हो अपनी तंग जिदंगी के कुछ हशीन लम्हे जीने। खैर मैं भी छुपके छुपके उसे देखता रहा और सोचता रहा की 'फिर क्या ही कारण था उस ऊंची कसी हुई चप्पल को पहन कर वहां खड़े होने का जो उसे खड़े होने में भी दर्द दे रही थी और वह बार बार कभी इधर से उधर चल रही थी मानौ जैसे 'रैम्प वॉक' कर रही हो 'स्लो मोशन' में। 



इसी के साथ अब सवाल ज़्यादा हो गए थे। जो मेरे दिमाग में उमड़ने लगे थे और मैं चाहता था कि अब दूर से देखना रोक दूं और पास जाकर सभी सवालों का जवाब जान लू उससे ही जिसकी वज़ह से ये तमाम सवाल मेरे दिमाग में थे। 

नज़र ऊपर ही उठी थी की इतने में एक मुसाफ़िर अचानक से उसके सामने आके रूक जाता है और हाथों से इशारा करते हुए अपने हाथों की हथेलियों को हिलाता है मानो जैसे उसका पता या कुछ और पूछ रहा हो।
उस आदमी का सिर्फ आधा चेहरा ही देख पा रहा था मैं। उसके लम्बे बाल और दाढ़ी की वज़ह से पहचान पाना उसे मुश्किल था पर वहां खड़ी लड़की ने जैसे ही मुंह बीचकाया और तैस में आकर मनाही वाले इशारे के साथ उसने भी हाथ हिला दिया। 
मानो किसी सौदे का टूट जाना और फिर कदमों पर चल कर वापिस जाना सा लगा मुझे उस मुसाफ़िर के चलने और बार बार थोड़ी दूर आगे जाकर, उसका पलट पलट के देखना और हाथों की उंगलियों से इसारें करना मुझे हज़म नहीं हो रहा था। 

अब सवाल और उनके कुछ जवाब दिमाग में साफ हो रहे थे पर फिर भी अगर उस लड़की से ही पूछ लिया जाए तो क्या बुराई है। मैंने अपना पहला कदम रख दिया था उसकी तरफ और इसी के साथ ही मेरी धड़कनो का तेज़ होना एक आम बात सी लगी मुझे। मैं ज्यादा कुछ नहीं पर अपने सवालों को याद कर रहा था और साथ ही पहला शब्द या उससे बात की शुरुआत कहां से की जाए बस यही मन ही मन बढ़ते कदमों के साथ सोच रहा था। 

बस अब कुछ ही कदम दूर थी वो और अब मेरी गर्दन जैसे नीचे की तरफ झुक गई थी आंखें सड़कों पर थी और सड़क पार पीली लाइट के खंभे के नीचे वो खड़ी थी। दोनों तरफ देखा मैंने और इंतज़ार किया गाड़ियों के गुजरने का सड़क से ताकि मैं सही सलामत सड़क को पार कर सकु। 

अचानक से हाॅर्न की आवाज़ सुनाई देती हैं। सफ़ेद रंग की फाॅरचुनर कार का अचानक ज़ोरदार होर्न के साथ ब्रेक मारते हुए रूक जाति है। और कार के अंदर बज रहे देसी गाने वहां खड़े सभी लोगों का ध्यान खींच लेते हैं। मेरे साथ खड़े एक व्यक्ति के मुंह निकलता है "बड़े बाप की बिगड़ी हुई औलाद"। 

अब यह दूसरी बार था जब कोई मेरी निगाहों और उसके बीच आ गया था। मैं सड़क के इस पार ही था अभी क्योंकि चलती गाड़ियों के बीच सड़क पार कर पाना मुश्किल था मेरे लिए। पर जितना आंखों से देख सकता था उतना लगातार देखने की कोशिश कर रहा था। 

वो मुझे बिल्कुल भी नज़र नहीं आ रही थी कार की वज़ह से जो ठीक उसके सामने आके रूक गई थी। कार के शीशे से कार के अंदर का  कुछ नज़र नहीं आ रहा था मानो जैसे काले शीशे लगे हो कार में। मेरी धड़कनें तेज थी और पैरों में जल्दबाजी थी सड़क पार जाकर सवालों के जवाब जानने के लिए। 

देखते ही देखते अब वह गाड़ी वहां से चल पड़ी थी जैसे ही वह गाड़ी वहां से आगे की तरफ बढ़ी वहां पर वो लड़की नज़र नहीं आ रही थी मैं हैरान सा हो गया था की कहीं वह कार? और उसमें बैठे लोग? या फिर कौन थी वो लड़की? 
क्या जो मैं उस लड़की के बारे में सोच रहा हूं सही है? 

ऐसे तमाम सवाल और जैसे ही लाल बत्ती की वज़ह से गाड़ीयां रूकती है वैसे ही मैं अब सड़क के उस पार था पर वो लड़की नहीं थी जिससे मैं तमाम सवाल पूछना चाहता था पर आप पास ही कई सारी उसी की तरह लड़कियां खड़ी थी उसी अंदाज में आंखों में अपनेपन का अहसास लिए। 

"वो जो यहां खड़ी थी वो कौन थी आप जानते हैं?" 
"कल आजाना इसी समय यही मिलेगी वो, रोज़ आती और जाती है, वैसे मैं भी कम नहीं इधर भी देख ले चिकने"

जवाब सुनते ही मैं दूर भाग चला और थोड़ी दूरी पर आकर जेब से मोबाइल निकाल समय देखा और खुद के होंठों को दांतों से दबाया और वाट्शप पर जाकर 'ब्रीथ' बाले नाम पर क्लिक कर मेसेज किया 'आते आते २ बज जाएगा तुम सो जाना मैं खाना गरमा के खा लूंगा' 

"तुम्हारे बीना नींद आई है क्या आज तक? जल्दी आना!" 

"ठीक है।"

और बस मोबाइल को जेब में रख दूर खड़े आॅटो वाले को इशारा दिया और फिर आॅटो में सवार हो मैं चल पड़ा घर की तरफ। पर सवाल अब भी कई थे उस लड़की को लेकर जिनका जवाब वही दे सकती थी। 



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