8 मार्च 2020 यानी कि विश्व महिला दिवस। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 8 मार्च की तारीख सभी महिलाओं के लिए चुनी गई तारिख है। यह तारिख नारीत्व और उनकी शक्ति जो समाज को बदलने के साथ ही समाज को नई दिशा दिखाने में भी सक्षम है, कि बात करती है।
महिलाओं ने अपने अधिकारों को पुरुषो के बराबर समाज में पाने के लिए क्या कुछ नहीं किया कई आंदोलन और समाज की रूढ़िवादी विचारधारा को भी आईना दिखाया तब जाके कहीं मत डालने का अधिकार, तो कहीं बराबरी का अधिकार पाया।
'मैं स्त्री हूं भगवान को भी अपने गर्भ में रखने की ताकत रखती हूं"
कुछ इस तरह कि प्रोत्साहन और जज़्बो से भरी बातें लिखकर और कलाकारी बनाकर लोगों तक महिला सशक्तिकरण की बात को पहुचाता दिल्ली में स्थित भारतीय रेलवे का तिलक ब्रिज रेलवे स्टेशन।
जहां से गुज़र रहे हर यात्री की नज़र इन अक्षरो और कलाकारियों पर जरूर पड़ती है।
महिलाएं महिलाओ कि मदद करती है।
यह बहुत ज़रूरी भी है और साथ में यह बात भी छुपी है इसमें की अगर हर मां चाह ले कि उसकी बीटिया पढ़ लिखकर नाम रोशन करेगी तो कोई नही रोक सकता।
अगर आप को लगता है कि आप सही है तो आपको कोई नही रोक सकता और इस बात का भी कुछ फर्क नहीं पड़ता कि कौन क्या कह रहा है।
महिलाएं अब नहीं है मजबूर कि उन्हें कोई अब झुका सके क्योंकि है हिम्मत उनमें भी की वो दूर्गा आइपीएस बन दुश्मनो को भगा सके।
आसमान की कोई सीमा नहीं, बस आपके दिमाग की है।
यूं तो नारी भारत में देवियों के दर्जे पर रखकर पूजी जाती है पर फिर भी जिस तरिके से नारि के खिलाफ ही जब आए दिन घटनाओं को अख़बारों और न्यूज़ चैनलो पर देखने और सुनने को मिलता है तो रूह कांप जाती है। और दुख होता है ऐसे पुरुषों पर जो एक महिला कि इज्ज़त बचाने कि बजाय लुटते हैं राक्षस बन।
तिलक ब्रिज रेलवे स्टेशन पर कि गई ऐसी कलाकारियां यहां से गुजरने वाले सभी यात्रियों के अंदर बदलाव कि बात करती है। महिलाओं के प्रति ऐसे जनजागरणो से ही समाज को बदल सही राह पर लाया जा सकता है।
महिला दिवस का असली मतलब तब साकार होगा जब महिलाएं पुरुषों से कंधा मिलाकर एक साथ आगे बढ़ कर समाज को नई दिशा और नई किरण दिखाएं। और साथ ही इतना विकास करे की एक दिन वो पुरूषों के अधिकारो कि बात कहें।
उन सभी महिलाओं को आज के दिन हम सभी को नमन् करना चाहिए जिन्होंने हमें जन्म दिया, और मेरी नानी जिनके किस्से कहानियों का एक पिटारा है मेरे पास, मेरी बहन जिसने हमेशा से मुझे पढ़ाया और प्रोताहित किया, दादी जिन्होंने मुझे प्यार दिया बचपने का, वह दोस्त जिसकी वज़ह से मैं समझ पाया एक स्त्री को, उस शिक्षक का जिसने पद पद पर सिखलाया किस्सा समाज का। आप सभी का बहुत-बहुत धन्यवाद मेरी जिंदगी में अपनी अपनी खुबसूरती के रंग भरने के लिए।











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