शनिवार, 6 जून 2020

जवाबदार कौन है?


मेरे इन सवालों का जवाब देने के लिए जवाबदार कौन है मेरी इस हालत का जिम्मेदार कौन है। त्रेता युग में सीता का दिया हुआ श्राप है या कलयुगी मानव का पाप मुझ पर आज है। इन सवालों का जवाब क्या आपके पास है।।

लालच में किए गए अपराध का, लालच से उद्घार है मिल रहा। लाचारी है छाई हुई कोई जवाब नहीं है सज रहा, हैं मौन क्यों मोहन मेरे ये आज मैं हूं पुछती इन सवालों के जवाबदार को हुं खोजती।। 

मजबूर होकर भी, मैं कुछ नहीं हूं बोलती, शायद मेरी बेजुबानी को कम है तौला जा रहा। जिस दिन शब्द निकलेंगे बेजुबान तुम हो जाओगे अपने ही पापों को सुनकर खमोश तुम हो जाओगे। क्या होगा जवाब तुम्हारे पास मुझे हलालने के बाद, हूं आज मैं यह पूछती।। 

सरकार मेरे सो गए हैं शायद वोहि एक आस थे पर फिर भी मैं इंसानों की बस्ती में सरकार को हूं खोजती। मिल गए सोते हुए तो जवाब मुझको मिल जाएगा कितनी परीक्षा होगी मेरी यह एहसास मुझको हो जाएगा ।। 

सुबह हो या शाम अब सड़कों पर डाला डेरा है। गुजरेंगे सरकार जो मेरे उनकी राहों को पीड़न के आंसूओं से घोउंगी। क्या पता दया कर दें रामजी तो मैं भी मुक्ति पाउंगी। हां हूं मैं ढुंढती राजीव नैन सरकार के जिनकी दृष्टि मात्र से तर गए प्रयागराज भी।।

मेरे इन सवालों का जवाब देने के लिए जवाबदार कौन है मेरी इस हालत का जिम्मेदार कौन है। त्रेता युग में सीता का दिया हुआ श्राप है या कलयुगी मानव का पाप मुझ पर आज है। इन सवालों का जवाब क्या आपके पास है।।

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