कलयुग का कोई रुप नही,
कलयुग का कोई भेष नही,
रावण और कंश नही समझो,
ये कलयुग है कोई नाम नही॥
ये राम नाम का सारथी,
द्वापर को लीला है इसने,
ये काल नही काली जैसा,
नाही भस्मासूर का अवतार॥
अगर दृष्टि है तो देख इसे,
यह तुझमे लय तेरा कल है,
ना ही त्रेता ना ही द्वापर,
ये नया कल तेरा युग है,
यह! कलयुग है यह! कलयुग है! ॥
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